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સોમવાર, 25 જાન્યુઆરી, 2010

सारे जहाँ से अच्छा

सारे जहाँ से अच्छा हिन्दुस्तां हमारा
हम बुल बुलें हैं इसकी ये गुलिस्ताँ हमारा
गुरबत में हो अगर हम रहता है दिल वतन में
समझो वहीं हमें भी दिल हो जहाँ हमारा
पर्वत वो सब से ऊँचा हम साया आसमाँ का
वो संतरी हमारा वो पासबाँ हमारा
गोदी में खेलती हैं इस की हजारों नदियाँ
गुलशन है जिन के दम से रश्क -ऐ -जनाँ हमारा
ऐ आब -ऐ -रूद -ऐ -गंगा वो दिन है याद तुझ को
उतरा तेरे किनारे जब कारवाँ हमारा
मज़हब नहीं सिखाता आपस में बैर रखना
हिन्दी हैं हम वतन है हिन्दुस्तां हमारा
यूनान -ओ -मिस्र -ओ -रोमा सब मिट गए जहाँ से
अब तक मगर है बाकी नाम -ओ -निशाँ हमारा
कुछ बात है की हस्ती मिटती नहीं हमारी
सदियों रहा है दुश्मन दौर -ऐ -ज़मां हमारा
'इकबाल' कोई महरम अपना नहीं जहाँ में
मालूम क्या किसी को दर्द -ऐ -निहां हमारा



गुरबत = परदेस
पासबाँ = चौकीदार
रश्क -ऐ -जनाँ = स्वर्ग की इर्ष्या
यूनान = ग्रीक, मिस्र = इजिप्त, रोमा = रोमन साम्राज्य
महरम =आत्मीय
दर्द -ऐ -निहां = छुपा हुआ -अंदरूनी दर्द


શનિવાર, 12 ડિસેમ્બર, 2009

लब पे आती है दुआ - इकबाल

लब पे आती है दुआ बन के तमन्ना मेरी
जिंदगी शम्मा की सूरत हो खुदाया मेरी
दूर दुनिया का मेरे दम अँधेरा हो जाये
हर जगह मेरे चमकने से उजाला हो जाये
हो मेरे दम से यूँ ही मेरे वतन की ज़ीनत
जिस तरह फुल से होती है चमन की ज़ीनत
जिंदगी हो मेरी परवाने की सूरत या रब
इल्म की शम्मा से हो मुझको मोहब्बत या रब
हो मेरा काम ग़रीबों की हिमायत करना
दर्द-मंदों से जईफों से मोहब्बत करना
मेरे अल्लाह बुराई से बचाना मुझको
नेक जो राह हो उस राह पे चलाना मुझको

इक़बाल

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दुआ = પ્રાર્થના, इल्म  = જ્ઞાન, शम्मा  = જ્યોત, ज़ीनत = રોનક, ગૌરવ, जईफों = વૃદ્ધ વયસ્કો, जिंदगी शम्मा की सूरत = પ્રજ્વલિત જ્યોત શુ જીવન 


મંગળવાર, 14 એપ્રિલ, 2009

सारे जहाँ से अच्छा - इकबाल

सारे जहाँ से अच्छा हिन्दुस्तां हमारा
हम बुल बुलें हैं इसकी ये गुलिस्ताँ हमारा
गुरबत में हो अगर हम रहता है दिल वतन में
समझो वहीं हमें भी दिल हो जहाँ हमारा
पर्वत वो सब से ऊँचा हम साया आसमाँ का
वो संतरी हमारा वो पासबाँ हमारा
गोदी में खेलती हैं इस की हजारों नदियाँ
गुलशन है जिन के दम से रश्क -ऐ -जनाँ हमारा
ऐ आब -ऐ -रूद -ऐ -गंगा वो दिन है याद तुझ को
उतरा तेरे किनारे जब कारवाँ हमारा
मज़हब नहीं सिखाता आपस में बैर रखना
हिन्दी हैं हम वतन है हिन्दुस्तां हमारा
यूनान -ओ -मिस्र -ओ -रोमा सब मिट गए जहाँ से
अब तक मगर है बाकी नाम -ओ -निशाँ हमारा
कुछ बात है की हस्ती मिटती नहीं हमारी
सदियों रहा है दुश्मन दौर -ऐ -ज़मां हमारा
'इकबाल' कोई महरम अपना नहीं जहाँ में
मालूम क्या किसी को दर्द -ऐ -निहां हमारा



गुरबत = परदेस
पासबाँ = चौकीदार
रश्क -ऐ -जनाँ = स्वर्ग की इर्ष्या
यूनान = ग्रीक, मिस्र = इजिप्त, रोमा = रोमन साम्राज्य
महरम =आत्मीय
दर्द -ऐ -निहां = छुपा हुआ -अंदरूनी दर्द

મંગળવાર, 17 ફેબ્રુઆરી, 2009


खिर्द के पास ख़बर के सिवा कुछ और नहीं
तेरा इलाज नज़र के सिवा कुछ और नहीं
... इकबाल

खिर्द = दिमाग


बिल्लोरी कुंतर ... Crystal glasses

हम मशरिक के मुसलमानों का दिल मगरिब में जा अटका है
वहां कुंतर सब बिल्लोरी है , यहाँ एक पुराना मटका है

इस दौर में सब मिट जायेंगे , हाँ बाकी वो रह जायेगा
जो कायम अपनी राह पे है, और पक्का अपनी हट का है

ऐ शैख़ -ओ -ब्राह्मण सुनते हो क्या अहल -ऐ -बसीरत कहते हैं
गर्दों ने कितनी बुलंदी से उन कौमों को दे पटका ही

अल्लामा इकबाल

अहल -ऐ -बसीरत = गवाह
गर्द = तूफ़ान
कुंतर = कांच
बिल्लोरी = क्रिस्टल

રવિવાર, 1 ફેબ્રુઆરી, 2009

ये भी क्या जिंदगी

ओ मेरे अरबाब, क्या तारे नुमायां कर गये
पैदा हुए, बी.ए. किये, नौकर बने और मर गये
- इक़बाल

શનિવાર, 24 જાન્યુઆરી, 2009

नया जहाँ

परवाज़ है दोनो की इसी एक फिझा में
कर्घज़ का जहाँ और है शाहीन का जहाँ और
....इक़बाल

મારા પછી - બાબુલ

 મારા પછી પાપ સાક્ષી પુણ્યની આપશે મારા પછી એ કયા માપે મને માપશે મારા પછી એકદા અંધારશે વાદળો ચોમેરથી માવઠું ભારે અશ્રુ સારશે મારા પછી  ક્યાં ...