Tuesday, 10 May 2011

‘तु क्या है ? - गालिब

ચાલો આજે સવાલ કરી લઈએ?  गालिब નો દોર દમામ ઉછીનો લઇ જરા આતમને ઢંઢોળી જોઈએ... અગાઉ પ્રસ્તુત અનુવાદ ' હું નથી હું 'http://avataran.blogspot.com/2011/03/blog-post_11.html ની સાપેક્ષ गालिबની ગઝલ ના આ ચૂંટેલા શેર ...

हर एक बात पे कहेते हो तुम, के तु क्या है ?’
तुम्ही कहो के ये अंदाझे गुफ्तगु क्या है ?

...

जला है जिस्म जहां दिलभी जल गया होगा
कुरेदते हो जो अब राख, जुस्तजू क्या है ?

रगों में दौडते फिरने के हम नहीं कायल
जब आंखही से न टपका तो फिर लहू क्या है ?

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हुए है शाह का मुसाहिब, फिरे है इतराता
वरना शहर में  'ग़ालिब'की  आबरू क्या है?

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