Saturday, 24 January 2009

हुदूदे-ज़ात


हुदूदे-ज़ात से बाहर निकल के देख ज़रा
न कोई ग़ैर न कोई रक़ीब लगता है
-मिर्ज़ा रफ़ी सौदा

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