Friday, 30 January 2009

अकबर इलाहाबादी

सुकूने क़ल्ब की दौलत कहाँ दुनिया-ए-फ़ानी में
बस इक ग़फ़लत सी हो जाती है और वो भी जवानी में

अकबर इलाहाबादी

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